COVID-19 Orders एनईजीपी परियोजना

एनईजीपी परियोजना

इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीआईईटीवाय) और प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआर एण्‍ड पीजी) द्वारा राष्‍ट्रीय ई-शासन योजना (एनईजीपी) का सूत्रण किया गया। केन्‍द्र सरकार ने 18 मई 2006 को 27 मिशन मोड परियोजनाओं और 10 घटकों के साथ एनईजीपी का अनुमोदन किया।

"सभी सरकारी सेवाओं को एक आम आदमी के लिए उसके आस पास सामान्‍य सेवा प्रदायगी बिन्‍दुओं के माध्‍यम से उपलब्‍ध कराना और आम आदमी की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए वहनीय मूल्यों पर उक्‍त सेवाओं की दक्षता, पारदर्शिता और विश्‍वसनीयता सुनिश्चित करना"

एनईजीपी की कार्यान्‍वयन कार्य नीति, मार्ग और विधि

ई-शासन का कार्यान्‍वयन एक अत्‍यंत जटिल प्रक्रिया है जिसमें हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, नेटवर्किंग, प्रक्रम पुन: इंजीनियरी और प्रबंधन में बदलाव की आवश्‍यकता होती है। पिछले समय से सीखे गए पाठों और सफल ई-शासन अनुप्रयोगों के अनुभव के आधार पर निम्‍नलिखित तथ्‍यों के साथ एनईजीपी के लिए एक मार्ग और विधि अपनाई गई है।

i. सामान्‍य समर्थन मूल संरचना : एनईजीपी के कार्यान्‍वयन में सामान्‍य और समर्थन आईटी मूल संरचना की स्‍थापना शामिल है जैसे : राज्‍य व्‍यापी क्षेत्र नेटवर्क (स्‍वान), राज्‍य डेटा केन्‍द्र (एसडीसी) सामान्‍य सेवा केन्‍द्र (सीएससी) और इलेक्‍ट्रॉनिक सेवा प्रदायगी गेटवे।

ii. शासन : सक्षम प्राधिकारियों के निर्देश में एनईजीपी के कार्यान्‍वयन की निगरानी और समन्‍वय के लिए पर्याप्‍त व्‍यवस्‍थाएं की गई हैं। इस कार्यक्रम में मानकों का विकास / अपनाना और नीति दिशानिर्देश, तकनीकी समर्थन प्रदान करना, क्षमता निर्माण, अनुसंधान और विकास आदि भी शामिल हैं। डीआईईटीवाय को एनआईसी, एसटीक्‍यूसी, सी-डैक, एनआईएसजी आदि जैसे विभिन्‍न संस्‍थानों सहित स्‍वयं को मजबूत बनाने की आवश्‍यकता है ताकि इन भूमिकाओं को प्रभावी रूप से निभाया जा सके।

iii. केन्‍द्रीयकृत पहल, विके‍न्‍द्रीकृत कार्यान्‍वयन : ई-शासन को नागरिक केन्द्रित अभिविन्‍यास सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य सीमा तक केन्‍द्रीय प्रयासों के माध्‍यम से बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि विभिन्‍न ई-शासन अनुप्रयोगों की अंत: प्रचालनीयता का उद्देश्‍य पूरा किया जा सके और विकेन्‍द्रीकृत कार्यान्‍वयन मॉडल को अपनाकर आईसीपी मूल संरचना और संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। यह सफल परियोजनाओं को अभिज्ञात करने और आवश्‍यकतानुसार परिवर्तन सहित इन्‍हें दोहराने पर भी लक्षित है।

iv. सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) : जहां भी सुरक्षा के पक्षों में कोई समझौता किए बिना संसाधन समूह को बढ़ाने के लिए पीपीपी मॉडल को अपनाया जाना चाहिए।

v. समेकित तत्‍व : नागरिकों, व्‍यापारों और संपत्ति के लिए विशिष्‍ट पहचान कोडों को अपनाने के लिए बढ़ावा दिया जाता है, ताकि समेकन की सुविधा सहित अस्‍पष्‍टता से बचा जा सके।

vi. राष्‍ट्रीय और राज्‍य स्‍तरों पर कार्यक्रम का मार्ग : एनईजीपी के कार्यान्‍वयन के लिए विभिन्‍न केन्‍द्रीय मंत्रालयों / विभागों और राज्‍य सरकारों को शामिल किया जाता है। इसमें शामिल एजेंसियों की संख्‍या तथा राष्‍ट्रीय स्‍तर पर समग्र समेकन और जुड़ाव की आवश्‍यकता को देखते हुए एनईजीपी का कार्यान्‍वयन प्रत्‍येक एजेंसी की सुपरिभाषित भूमिकाओं और जिम्‍मेदारियों के साथ एक कार्यक्रम के रूप में किया जा रहा है। इसकी सुविधा देने के लिए उपयुक्‍त कार्यक्रम प्रबंधन संरचनाएं बनाई गई हैं।

vii. मंत्रालयों का स्‍वामित्‍व : एनईजीपी के तहत विभिन्‍न एनएनपी का स्‍वामित्‍व है और इन्‍हें संबंधित मंत्रालयों द्वारा आगे बढ़ाया जाता है। यदि इसमें ऐसी कोई जारी परियोजनाएं हैं जो एमएमपी श्रेणी में आती हैं तो उन्‍हें एनईजीपी के उद्देश्‍यों के साथ सरेखित बनाने के लिए उपयुक्‍त रूप से उन्‍नत बनाया जाएगा। भारत निर्माण, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना आदि जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए संबंधित मंत्रालयों को ई-शासन का उपयोग करने की सलाह दी गई है ताकि आरंभिक चरण से ही स्‍वचालन की तकनीक अपनाई जा सके। राज्‍यों को कुछ अतिरिक्‍त राज्‍य विशिष्‍ट परियोजनाओं को चुनने का लचीलापन दिया गया है, जो उस राज्‍य के आर्थिक विकास के लिए संगत है।

अद्यतन दिनांक: 25-08-2014

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अद्यतन दिनांक: 08-03-2021

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